सरकारी नौकरी' का झांसा देकर 15 युवाओं से 22.50 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र से स्कूलों में कराया काम




संवाददाता सलीम शेख 

आजमगढ़। सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवक-युवतियों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ठगों ने बेसिक शिक्षा विभाग के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र और आदेश तैयार कर 15 अभ्यर्थियों को सठियांव विकास खंड के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में योग शिक्षक के रूप में तैनात करा दिया। हैरत की बात यह रही कि अभ्यर्थियों ने महीनों तक विद्यालयों में योग प्रशिक्षण भी दिया, लेकिन जब वेतन की बारी आई तो पूरा खेल उजागर हो गया।
पीड़ितों के अनुसार, प्रत्येक अभ्यर्थी से नौकरी दिलाने के नाम पर 1.35 लाख से 1.50 लाख रुपये तक लिए गए। सभी को बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के नाम से जारी कथित नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिनमें 12,450 से 13,500 रुपये मासिक मानदेय का उल्लेख था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कराया गया।
अप्रैल और मई 2025 के दौरान अभ्यर्थियों ने नियमित रूप से विद्यालयों में योग प्रशिक्षण दिया। लेकिन वेतन के लिए विभाग से संपर्क करने पर पता चला कि ऐसी कोई नियुक्ति कभी हुई ही नहीं थी। विभाग ने नियुक्ति पत्र और आदेशों को फर्जी बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।
ठगी का शिकार हुए अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुबारकपुर थाने और पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर पूरे गिरोह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है।
इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी सत्यापन के विद्यालयों में जॉइनिंग कैसे हुई, अभ्यर्थियों से महीनों तक कार्य कैसे कराया गया और विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी—ये सवाल अब जांच का विषय बन गए हैं।
शिकायतकर्ताओं में सुनीता जायसवाल, साधना देवी, पवन राजभर, अंजलि वर्मा, प्रियंका वर्मा, रेनू जायसवाल, दीपक मिश्रा, सिमरन मद्धेशिया, प्रिया जायसवाल, रुक्मिणी देवी, रूपा जायसवाल, राहुल गोंड, वंदना जायसवाल, राजेश कुमार सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post