पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त सरकार से पूछा आखिर कब होंगे चुनाव



संवाददाता मोहम्मद फारूक 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर जारी असमंजस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह तक बढ़ाने के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि पंचायत चुनाव आखिर कब कराए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक चुनाव की संभावित तिथि अदालत को बताई जाए। साथ ही कोर्ट ने 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया है।
मामला ग्राम प्रधानों के कार्यकाल में छह महीने के विस्तार से जुड़ा है, जिसे याचिकाकर्ता अमरेंद्र नाथ ने अदालत में चुनौती दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार की दलीलों पर संतोष नहीं जताया और चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
गौरतलब है कि प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के कारण राज्य सरकार ने उनका कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया था। वर्तमान में ग्राम प्रधान प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव जल्द कराए जाने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को पंचायत चुनाव की समयसीमा और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

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