शाहजहाँपुर मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर से सामने आया यह दृश्य स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। करीब 70 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज को काफी मशक्कत के बाद ट्रॉमा सेंटर की गैलरी में बेड मिला, लेकिन वहां पंखे जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में उनकी बुजुर्ग पत्नी खुद हाथ वाले पंखे से उन्हें लगातार हवा करती रहीं। उम्र और थकान के बावजूद पति की सेवा में जुटी इस महिला का दृश्य हर संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर देने वाला है।
वहीं, अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के तीमारदारों का आरोप है कि एक स्ट्रेचर के लिए पूरे परिसर में भटकना पड़ता है। स्ट्रेचर मिल जाए तो बेड नहीं मिलता, और बेड मिल जाए तो आवश्यक सुविधाओं का अभाव रहता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज में यदि मरीजों को पंखा, स्ट्रेचर और समय पर बेड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, तो व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान देकर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि मरीजों को सम्मानजनक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
शाहजहांपुर से अजय सिंह की खास रिपोर्ट
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