लालगंज में मौत के अस्पताल फिर चालू सीज अस्पतालों पर फिर जलने लगी लाइटें झोलाछाप डॉक्टरों के दम पर चल रहा इलाज का काला कारोबार स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई बनी मजाक जनता पूछ रही आखिर किसके संरक्षण में चल रहा स्वास्थ्य माफिया तंत्र



संवाददाता जाबिर शेख 

आजमगढ़ लालगंज तहसील क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर चल रहे कथित मौत के कारोबार ने एक बार फिर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर कुछ माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीज की मुहर लगाई थी, वही अस्पताल अब फिर से खुलेआम मरीजों का इलाज करते दिखाई दे रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन अस्पतालों को अवैध संचालन, फर्जी डॉक्टरों, बिना प्रशिक्षित स्टाफ और गंभीर अनियमितताओं के कारण बंद किया गया था, वहां आज भी वही पुराना खेल जारी है। बिना डिग्री वाले झोलाछाप डॉक्टर गरीब और अनजान लोगों की जिंदगी के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2025-26 में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार के निर्देश पर लालगंज क्षेत्र में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया था। इस दौरान 10 से अधिक अस्पतालों को गंभीर कमियों के चलते सीज किया गया था। जांच में सामने आया था कि अस्पतालों में न योग्य डॉक्टर थे, न प्रशिक्षित स्टाफ और न ही इलाज के बुनियादी संसाधन। इसके बावजूद अब उन्हीं अस्पतालों में फिर से मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अस्पतालों में गलत इलाज, फर्जी ऑपरेशन और अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। कई मामलों में मरीजों की मौत तक हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल सीज थे तो आखिर दोबारा किसके आदेश पर खोले गए?
सूत्रों की मानें तो बिना स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत या संरक्षण के यह संभव नहीं हो सकता। आरोप है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर स्वास्थ्य माफिया पूरे सिस्टम को चुनौती दे रहा है। यही वजह है कि कार्रवाई के बाद भी अवैध अस्पतालों के बोर्ड फिर चमकने लगे हैं और झोलाछाप डॉक्टर सफेद कोट पहनकर मरीजों की जिंदगी से खेल रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि जल्द कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। लोगों का कहना है कि गरीबों की जान को व्यापार बना चुके ऐसे अस्पतालों पर सिर्फ सील नहीं, बल्कि स्थायी कार्रवाई होनी चाहिए।
जनता की प्रमुख मांगें
सीज किए गए अस्पतालों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच हो।
दोबारा संचालित हो रहे अवैध अस्पतालों को तुरंत बंद कराया जाए।
झोलाछाप डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।
लालगंज क्षेत्र के सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का सत्यापन अभियान चलाया जाए।
गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद करो  स्वास्थ्य माफियाओं पर बुलडोजर चलाओ!”

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