फेरीवालों की समस्या का मुंबई मनपा ने निकला तोड़ ; करवाई के लिए ठेके पर रखेगी कर्मचारी


संवाददाता,,, फवाज़ शेख

 मुंबई: मुंबई में अनधिकृत फेरीवालों की बढ़ती समस्या को दूर करने के लिए मुंबई मनपा ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मुंबई के सभी वार्डों में अलग-अलग टेंडर जारी करने की बात कहीं गई है। इसके साथ ही जब्त माल को गोदाम तक पहुंचाने के लिए ट्रकों को भी किराये पर लिया जाएगा. वर्तमान में नगर पालिका के अतिक्रमण हटाओ विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण ठेके पर कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ रही है।

मुंबई में लगभग एक लाख फेरीवाले सड़कों के किनारे और फुटपाथ पर दुकानें लगाते हैं। इसलिए ट्रैफिक जाम, पैदल यात्रियों के लिए चलने के लिए जगह की कमी जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मुंबई मनपा हर दिन वार्ड अतिक्रमण हटाने वाले विभाग के माध्यम से अनधिकृत फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई करता है लेकिन वही स्थिति ज्यू की त्यु है। खासकर अतिक्रमण हटाने वाले विभाग में कर्मियों की कमी के कारण ठेला-खोमचा वालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है.

फेरीवालों की संख्या और कार्रवाई की गति को देखते हुए मनपा ने ठेका कर्मचारियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। सूत्रों ने बताया कि सभी 24 वार्डों में इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही इन कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी.

मुंबई नगर निगम ने जनवरी से मई 2023 तक पांच महीनों में अनधिकृत फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान 76 हजार 235 हॉकर्स कार्रवाई की जद में आए हैं. अप्रैल की तुलना में मई में बढ़ोतरी हुई है। मई में 17 हजार 806 फेरीवालों पर कार्रवाई की गयी. मुंबई शहर और उपनगरों, विशेषकर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में अनधिकृत फेरीवालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इसलिए कहा गया कि ठेका कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

2014 में केंद्र सरकार के आदेश के बाद मुंबई मनपा ने मुंबई में फेरीवालों का सर्वे किया था. मुंबई में 1 लाख 28 हजार 443 फेरीवाले पाए गए. इस संबंध में मुंबई के 24 वार्डों से 99 हजार 435 आवेदन प्राप्त हुए थे. जांच के बाद नगर पालिका ने 15 हजार 361 फेरीवालों को पात्र घोषित किया। अब यह संख्या 32 हजार 407 है, लेकिन नौ साल में रेहड़ी-फड़ी नीति नहीं बनी।

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