गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ने गर्भवती महिला और दो नवजातों की जिंदगी डाली खतरे में!कुमार सोनोग्राफी सेंटर पर गंभीर आरोप, आखिर कहां सो रहा स्वास्थ्य विभाग?सीएमओ कार्यालय की जांच और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार





आजमगढ़। जिले में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आसिफगंज स्थित कुमार सोनोग्राफी क्लीनिक पर गर्भवती महिला की गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने और जांच में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। आरोप है कि सेंटर की एक रिपोर्ट ने गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने के बाद अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय की कार्यप्रणाली और निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर उसकी निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
महाराजगंज थाना क्षेत्र निवासी शिवम ने सीएमओ को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी किरण देवी का गर्भावस्था के दौरान कुमार सोनोग्राफी क्लीनिक पर अल्ट्रासाउंड कराया गया था। सेंटर की रिपोर्ट में जुड़वां बच्चों की जानकारी नहीं दी गई, जबकि प्रसव के दौरान दो बेटियों का जन्म हुआ। पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय रहते सही जानकारी मिल जाती तो चिकित्सकों को प्रसव की तैयारियां करने में सहूलियत होती। परिवार का दावा है कि गलत रिपोर्ट के कारण प्रसव के दौरान मां और दोनों नवजातों की जान पर बन आई। हालांकि, किसी तरह तीनों की जान बच गई।
शिवम ने इस मामले में संबंधित सेंटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने, निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।

आखिर सीएमओ कार्यालय की निगरानी व्यवस्था कहां है?

इस घटना ने जिले के स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जनपद में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच आखिर किस आधार पर होती है? क्या विभाग केवल कागजी कार्रवाई और शिकायत मिलने के बाद नोटिस जारी करने तक ही सीमित है? क्या सेंटरों की मशीनों, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और निर्धारित मानकों का नियमित निरीक्षण किया जाता है?
जिले में निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सीएमओ कार्यालय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आखिर सीएमओ कार्यालय की निगरानी व्यवस्था कहां है?
इस घटना ने जिले के स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जनपद में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच आखिर किस आधार पर होती है? क्या विभाग केवल कागजी कार्रवाई और शिकायत मिलने के बाद नोटिस जारी करने तक ही सीमित है? क्या सेंटरों की मशीनों, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और निर्धारित मानकों का नियमित निरीक्षण किया जाता है?
जिले में निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सीएमओ कार्यालय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आखिर सीएमओ कार्यालय की निगरानी व्यवस्था कहां है?

इस घटना ने जिले के स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जनपद में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच आखिर किस आधार पर होती है? क्या विभाग केवल कागजी कार्रवाई और शिकायत मिलने के बाद नोटिस जारी करने तक ही सीमित है? क्या सेंटरों की मशीनों, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और निर्धारित मानकों का नियमित निरीक्षण किया जाता है?
जिले में निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सीएमओ कार्यालय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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