लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव में देरी का असर विकास कार्यों पर न पड़े, इसके लिए शासन ने निवर्तमान ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में बड़ी राहत दी है। पंचायती राज विभाग ने उनके अधिकारों और कार्यों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए लंबित विकास कार्यों और भुगतान को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।
प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराए गए निर्माण एवं अन्य कार्यों का भौतिक और तकनीकी सत्यापन कराने के बाद उनका भुगतान किया जा सकेगा। वहीं ब्लॉक और जिला पंचायतों में तैनात कर्मचारियों के वेतन समेत नियमित प्रशासनिक कार्य भी प्रशासक के रूप में जारी रहेंगे।
अटके निर्माण कार्यों को भी मिलेगी रफ्तार
शासन ने उन विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी है, जिन्हें क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत बोर्ड ने पहले ही स्वीकृति दे दी थी और जिनकी निविदा भी हो चुकी थी, लेकिन किसी कारण से निर्माण शुरू नहीं हो पाया था। हालांकि ऐसे कार्य शुरू कराने से पहले संबंधित प्रशासक को जिलाधिकारी से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
बैठकों पर लगा ब्रेक, बड़े फैसलों के लिए अनुमति जरूरी
नई क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के गठन तक प्रशासक के रूप में कोई शासकीय या विभागीय बैठक आयोजित नहीं की जा सकेगी। नीति, नियम, न्यायालय के आदेश या शासनादेश के अनुपालन में जरूरी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी संबंधित अधिकारी की अनुमति लेनी होगी।
महत्वपूर्ण मामलों में निवर्तमान ब्लॉक प्रमुखों को जिलाधिकारी और जिला पंचायत अध्यक्षों को मंडलायुक्त से अनुमति लेनी होगी। मंडलायुक्त को ऐसे मामलों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर निर्णय लेकर जिलाधिकारी और संबंधित जिला पंचायत को अवगत कराना होगा।
आरोपों में घिरे निवर्तमान प्रमुखों को अलग व्यवस्था
जिन निवर्तमान ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ किसी आरोप के चलते कार्रवाई की गई है, वहां प्रशासक के रूप में संबंधित उप जिलाधिकारी कार्य करेंगे।
गौरतलब है कि जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच वर्ष का कार्यकाल 11 जुलाई और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को पूरा होने के बाद उन्हें प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले शासन ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी कर चुका है।
नई गाइडलाइन से जहां विकास कार्यों और लंबित भुगतान को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं महत्वपूर्ण फैसलों और बैठकों पर शासन ने अनुमति की लगाम भी कस दी है।
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