क्या है पूरा मामला
यह विवाद करीब 15 साल पुराना है और राजपाल यादव की फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2010 में फिल्म बनाने के लिए राजपाल यादव की प्रोडक्शन कंपनी ने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये लिए थे।
फिल्म के व्यावसायिक रूप से सफल नहीं होने के बाद रकम लौटाने को लेकर विवाद हुआ। भुगतान के लिए दिए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए, जिसके बाद राजपाल यादव के खिलाफ सात अलग-अलग चेक बाउंस मामले दर्ज हुए।
हाईकोर्ट ने सुनाई थी सजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में सातों मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखी थी। उन्हें प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा सुनाई गई थी और अदालत ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया था।
इसके अलावा प्रत्येक मामले में करीब 1.05 करोड़ रुपये की रकम शिकायतकर्ता को देने का आदेश था। पहले जमा की गई लगभग 2.25 करोड़ रुपये की राशि को भी समायोजित करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजपाल यादव को अंतिम मौका देते हुए कहा कि उन्हें:
दो सप्ताह के भीतर कम से कम 2 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।
बाकी बकाया राशि के लिए सुरक्षा/सिक्योरिटी देनी होगी।
उनका पासपोर्ट सरेंडर रहेगा।
अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।
मिडिया रिपोर्ट ए के सिह
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