शाहजहांपुर। अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज का खर्च सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं रहता। ग्लव्स, सिरिंज, कैथेटर और आइवी इंफ्यूजन सेट जैसे मेडिकल कंज्यूमेबल्स का बिल भी तीमारदार की जेब पर भारी पड़ता है। आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे की ओर से सामने रखे गए आंकड़ों के अनुसार, कुछ मेडिकल सामग्री की खरीद कीमत और मरीज से वसूली जाने वाली राशि में बड़ा अंतर सामने आया है।
आंकड़ों के मुताबिक, आइवी इंफ्यूजन सेट (ग्लूकोज चढ़ाने वाली नली) अस्पताल ने करीब 11 रुपये में खरीदा, जबकि मरीज से इसकी एमआरपी 325 रुपये तक वसूली गई। इसी तरह कैथेटर करीब 29 रुपये में खरीदा गया, लेकिन मरीज के बिल में 310 रुपये जोड़े गए। सामान्य डिस्पोजेबल सिरिंज की खरीद कीमत करीब 6.75 रुपये बताई गई, जबकि मरीज से 57 रुपये वसूले गए। आईसीयू या अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी से जूझ रहे मरीज के परिजन अक्सर हर उस सामान की कीमत चुकाने को मजबूर होते हैं, जिसका इस्तेमाल इलाज में किया जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की खरीद कीमत और मरीज से वसूली जाने वाली राशि के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है?
कई अस्पतालों में मरीज के तीमारदारों को बाहर से मेडिकल सामग्री खरीदकर लाने की अनुमति नहीं होती और सामान अस्पताल के इन-हाउस स्टोर से ही लेने को कहा जाता है। ऐसे में मरीज के पास अस्पताल द्वारा तय कीमत पर सामग्री लेने के अलावा विकल्प सीमित रह जाता है। दवाओं की कीमतों पर नियामकीय व्यवस्था है, लेकिन सिरिंज, ड्रिप सेट, कैथेटर और अन्य कंज्यूमेबल्स के मामले में खरीद कीमत और मरीज से वसूली जाने वाली राशि के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठते रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल सामग्री की खरीद कीमत, एमआरपी और मरीज से वसूली गई राशि में पारदर्शिता होनी चाहिए। तीमारदारों को भी बिल की प्रत्येक वस्तु और उसकी कीमत की जानकारी मांगने का अधिकार होना चाहिए। सवाल सिर्फ बिल का नहीं, उस व्यवस्था का है जिसमें इलाज के संकट में घिरे परिवार को हर कीमत चुकानी पड़ती है।
शाहजहांपुर से अजय सिंह की रिपोर्ट
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