कर्नाटक बताया जा रहा है कि उन्हें कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर से मिलने से रोक दिया गया था। इसके बाद उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
शिवानंद रेड्डी भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री में नायक के पद पर तैनात रहे हैं। कारगिल युद्ध के दौरान वह घायल हो गए थे और इस वजह से दिव्यांग भी हुए। रिटायरमेंट के बाद वह पिछले कई वर्षों से जमीन आवंटन की मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों, नेताओं और मंत्रियों के चक्कर लगा रहे थे।
बताया जा रहा है कि जमीन आवंटन का उनका मामला 26 साल से अधिक समय से लंबित है। इसी सिलसिले में वह डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर से मुलाकात कर अपनी मांग रखने पहुंचे थे। आरोप है कि उन्हें डिप्टी सीएम से मिलने नहीं दिया गया।
जहरीला पदार्थ खाने से पहले शिवानंद रेड्डी ने प्रशासन के नाम एक भावुक पत्र भी लिखा। पत्र में उन्होंने अपनी स्थिति और लंबे समय से लंबित जमीन आवंटन का जिक्र करते हुए कथित तौर पर लिखा कि देश की सेवा करना उनकी गलती थी।
जहरीला पदार्थ खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद पूर्व सैनिक के परिवार और समर्थकों में नाराजगी है।
कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए घायल हुए पूर्व सैनिक को 26 साल से जमीन आवंटन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े और अब उनके आत्महत्या की कोशिश करने की खबर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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