संवाददाता जाबिर शेख
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान "ऑपरेशन CyVazra" के तहत आजमगढ़ पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए देशव्यापी साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई में 11 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 684 से अधिक शिकायतों की जांच के बाद 13 मुकदमे दर्ज किए गए और गिरोह के सदस्यों तक पहुंच बनाई गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में साइबर सेल और विभिन्न थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर साइबर ठगी में प्रयुक्त महिंद्रा थार, दो मोटरसाइकिलें, 13 हाई-एंड मोबाइल फोन, विदेशी सिम कार्ड, 14 एटीएम कार्ड, ब्लैंक चेकबुक, फर्जी आधार, पैन, मतदाता पहचान पत्र, मालदीव वर्क परमिट, फर्जी कंपनियों की रबर मुहरें तथा अन्य दस्तावेज बरामद किए। साथ ही ₹10.46 लाख की साइबर ठगी से संबंधित धनराशि विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराई गई।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह फर्जी फर्म बनाकर म्यूल बैंक खाते तैयार करता था, जिनके जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था। जांच में ऐसे खातों में मात्र तीन दिनों के भीतर करीब ₹40 लाख के संदिग्ध लेन-देन का भी पता चला है।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक सदस्य फर्जी मालदीव वर्क परमिट तैयार कर बेरोजगार युवकों से विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता था। वहीं दूसरा आरोपी टेलीग्राम पर फर्जी गेमिंग, कसीनो और प्रेडिक्शन चैनल चलाकर लोगों से ऑनलाइन पैसा ऐंठता था। एक अन्य आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से अश्लील सामग्री बेचने और ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क संचालित कर रहा था।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी फर्जी पहचान पत्र, बैंक खाते, मोबाइल सिम और एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध को अंजाम देते थे। पूरे नेटवर्क, सहयोगियों और साइबर अपराध से अर्जित संपत्तियों की गहन तकनीकी जांच जारी है।
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
Post a Comment