शाहजहाँपुर जलालाबाद में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा काले झंडे दिखाकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर शाहजहाँपुर पुलिस की कार्रवाई शुक्रवार को भारी विवाद का कारण बन गई। पत्रकारों का आरोप है कि बिना पर्याप्त तथ्य और साक्ष्य के दो पत्रकारों को रात में एसओजी द्वारा हिरासत में लिया गया, जिससे पूरे पत्रकार समाज में आक्रोश फैल गया। बताया गया कि बुधवार को जलालाबाद में उप मुख्यमंत्री के काफिले के विरोध का एक वीडियो किसी अज्ञात व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। आरोप है कि इसी वीडियो के आधार पर पुलिस ने पत्रकार प्रभाकर मिश्र और विषेक मिश्र पर संदेह जताया। गुरुवार देर रात जब दोनों बाइक से अपने घर लौट रहे थे, तभी एसओजी टीम ने उन्हें रास्ते में रोक लिया, उनके मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए और पुलिस लाइन ले जाकर घंटों पूछताछ की। पत्रकारों का कहना है कि काफी देर तक जांच-पड़ताल के बावजूद पुलिस को दोनों के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक सामग्री या वीडियो अपलोड करने का प्रमाण नहीं मिला। इसके बाद देर रात उन्हें बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।इस घटना से पत्रकारों में भारी रोष फैल गया। शुक्रवार को जिले के बड़ी संख्या में पत्रकारों ने एकजुट होकर फ्लैग मार्च निकाला और पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। पत्रकारों का कहना था कि बिना सत्यापन के पत्रकारों को उठाना न केवल उनकी गरिमा पर आघात है बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।फ्लैग मार्च कलेक्ट्रेट पहुंचने पर माहौल गर्म हो गया। पत्रकारों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। पूरी घटना पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में बिना पर्याप्त आधार किसी पत्रकार के साथ इस प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी तथा ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी वीडियो की जांच करनी थी तो कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस देकर पूछताछ की जा सकती थी लेकिन रात में रास्ते से उठाकर मोबाइल जब्त करना और घंटों हिरासत में रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित नहीं माना जा सकता। पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई गईं तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
शाहजहांपुर से अजय सिंह की रिपोर्ट
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