वाराणसी कोर्ट ने भगवान राम को कथित तौर पर काल्पनिक कहने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली याचिका पर फिर से सुनवाई का निर्णय लिया है।वाराणसी के एमपी-एमएलए सीनियर कोर्ट ने बुधवार को इस संबंध में बड़ा फैसला दिया। ऊपरी अदालत ने लोअर कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिका को सुनवाई योग्य न बताते हुए खारिज कर दिया गया था। अतिरिक्त जिला जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने केस को वापस लोअर कोर्ट भेजते हुए इस पर नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला?
कांग्रेस के रायबरेली सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर अमेरिका के न्यूयॉर्क में ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान राम को काल्पनिक कहने का आरोप लगा है। अमेरिका दौरे के दौरान ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने भागवान राम को काल्पनिक चरित्र बताया था। इसके बाद 2025 से ही यह मामला गरमाया हुआ है। मामले में वकील हरिशंकर पांडेय ने कांग्रेस पार्टी को नोटिस भेजी थी। इसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम को काल्पनिक बताने वाला वक्तव्य स्थानीय अखबारों में प्रकाशित किया गया था।
मामले में वकील की ओर से कांग्रेस पार्टी को भेजी गई नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद वे मामले को लेकर कोर्ट में पहुंचे। 10 जून 2026 को एमपी-एमएलए कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका खारिज कर दी। याचिका के संबंध में कोई जांच भी नहीं कराई गई। आदेश के खिलाफ हरिशंकर पांडेय ने 26 सितंबर को जिला जज कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
क्या कहते हैं वकील?
वकील हरिशंकर पांडेय ने कोर्ट के आदेश पर कहा कि हमने मामले को निचली अदालत में उठाया था। वहां बिना जांच के हमारी याचिका खारिज कर दी गई। इसके खिलाफ हम ऊपरी अदालत में गए। ऊपरी अदालत ने हमारी दलीलें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी को भगवान राम के काल्पनिक चरित्र बताने वाले बयान पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
वकील हरिशंकर पांडेय ने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद निचली अदालत से फैसला हमारे पक्ष में आता है और अगर जांच में बयान की पुष्टि होती है तो राहुल गांधी पर आईपी की धाराओं के तहत गंभीर आरोप लग सकते हैं। इनमें पांच साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
हिंदुओं के अपमान का आरोप
वकील हरिशंकर पांडेय ने याचिका में दावा किया है कि राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन दौरे पर इस संबंध में बयान दिया था। दरअसल, ब्राउन यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ राहुल गांधी का एक सेशन था। राहुल गांधी ने इसी कार्यक्रम में भगवान श्रीराम पर विवादित बयान दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी ने भगवान राम को 'काल्पनिक चरित्र' बताया था। साथ ही, उस युग पर बताई जाने वाली कहानियों को काल्पनिक कहा। याचिका में दावा किया गया है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार सनातन धर्म के पूर्व अवतारों और महान प्रतीकों पर अनर्गल बयान देकर हिंदुओं को अपमानित कर रही है।
क्या था राहुल गांधी का बयान?
राहुल गांधी ने ब्राउन यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में हिंदू राष्ट्रवाद के दौर में धर्मनिरपेक्ष राजनीति पर बयान दिया था। इसमें उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को इसके खिलाफ इस्तेमाल किए जाने पर भी बात कही थी। राहुल गांधी ने कहा था कि भारत के सभी महान सुधारक और विचारक, जैसे बुद्ध, गुरु नानक, महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर बिना भेदभाव के रहे। ये लोग क्षमाशील, दयालु और सहिष्णु थे। हालांकि, भाजपा का दृष्टिकोण हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। यह नफरत फैलाने वाला है। इसी क्रम में उन्होंने भगवान राम पर टिप्पणी की थी।
संवाददाता शुभाष तिवारी
Post a Comment