मुहर्रम का चांद दिखते ही बुलंद हुईं “या हुसैन” की सदाएं, मजलिसों और मातम का सिलसिला शुरू




संवाददाता मोहम्मद यासिर  

आजमगढ़ सरायमीर। मुहर्रम का चांद नजर आते ही मंगलवार की शाम पूरे क्षेत्र में गम और अकीदत का माहौल छा गया। चांद दिखाई देने के साथ ही इमामबाड़ों और अज़ाखानों में शहादत-ए-इमाम हुसैन (अ.) और शोहदाए कर्बला की याद में मजलिसों, नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला शुरू हो गया। अज़ादारों ने सियाह परचम लगाकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया तथा “या हुसैन” की सदाओं से माहौल गूंज उठा।

सरायमीर नगर के साथ-साथ निकामुद्दीनपुर, कोरौली, कमालपुर, क़स्बा, फत्तेहपुर, पुरन्दरपुर, बेलहरी, रसूलपुर, ओहदपुर, ओसती, खपड़ागांव और बिजहर सहित विभिन्न गांवों में मजलिसों का आयोजन किया गया। इन मजलिसों में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को याद किया।

मजलिसों को संबोधित करते हुए उलेमा और मौलानाओं ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.) की कुर्बानी पूरी इंसानियत के लिए एक महान संदेश है। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाकया हमें सत्य, न्याय, सब्र, इंसाफ और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देता है। इमाम हुसैन (अ.) ने अपने अहलेबैत और वफादार साथियों के साथ जो बेमिसाल कुर्बानी पेश की, वह मानवता के लिए हमेशा राहे-हिदायत बनी रहेगी।

विभिन्न जिलों से आए वक्ताओं ने मुहर्रम के पवित्र दिनों में आपसी भाईचारा, अमन और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने लोगों से कहा कि इमाम हुसैन (अ.) की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, एकता और इंसाफ का संदेश फैलाएं।

दो माह आठ दिन तक रहेगा सोग

शिया कमेटी के मीडिया इंचार्ज सैय्यद मोहम्मद हुसैन ने बताया कि चांद दिखाई देने के बाद बुधवार से मुहर्रम की पहली तारीख शुरू होगी, जबकि यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) 26 जून को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि शोहदाए कर्बला की याद में दो माह आठ दिन तक मजलिसों, मातम और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न इमामबाड़ों और अज़ाखानों में रोजाना धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

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