मोहर्रम की चौथी तारीख पर निकले जुलूस, जनाबे अली असगर (अ.स.) की शहादत का हुआ मार्मिक तज़किरा




संवाददाता मोहम्मद यासिर  

आजमगढ़ सरायमीर। मोहर्रम की चौथी तारीख के अवसर पर सरायमीर सहित ग्रामीण क्षेत्रों ओसती, खपड़ागांव एवं ओहदपुर में मजलिसों और जुलूसों का आयोजन किया गया। इस दौरान हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के छह माह के मासूम बेटे जनाबे अली असगर (अ.स.) की शहादत को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जुलूसों में शबीह-ए-जुलजनाह, ताबूत, झूला एवं अलम की ज़ियारत कराई गई।
ग्राम ओसती में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद आरज़ू हुसैन ने कहा कि कर्बला का पैगाम पूरी इंसानियत के लिए है। इमाम हुसैन (अ.स.) ने ज़ुल्म के सामने झुकने के बजाय हक़ और इंसाफ़ की राह चुनकर महान कुर्बानी पेश की। जुलूस में अंजुमन सज्जादिया मुबारकपुर, अंजुमन मोहिब्बाने हुसैन समंदपुर, अंजुमन तबलीगे अज़ा मकसूदनचक तथा अंजुमन जाफरिया रसूलपुर ने नौहाख्वानी व मातम किया।
वहीं खपड़ागांव में मौलाना हुसैन हैदर ने कहा कि जनाबे अली असगर (अ.स.) की शहादत अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करने का संदेश देती है। उन्होंने मोहर्रम को सब्र, त्याग, भाईचारे और इंसानियत की सेवा का प्रतीक बताते हुए लोगों से इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की अपील की।

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