आजाद भारत के महान योद्धाओं में शुमार थे स्व. सीताराम सिंह ‘बच्चा बाबू’





आजमगढ़। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गौरवशाली परंपरा में जनपद आजमगढ़ के लालगंज तहसील अंतर्गत मेहनाजपुर निवासी स्वर्गीय सीताराम सिंह "बच्चा बाबू" का नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। वर्ष 1918 में जन्मे बच्चा बाबू ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को समर्पित कर दिया।
भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के दौरान जब अंग्रेजी हुकूमत ने क्षेत्र में दमनचक्र तेज कर दिया था, तब बच्चा बाबू ने युवाओं को संगठित कर स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विभिन्न आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। स्वतंत्रता की लड़ाई में उन्होंने अनेक कठिनाइयों, यातनाओं और सरकारी दमन का सामना किया, लेकिन कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद भी उन्होंने सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली सुविधाओं और सम्मान के प्रति कभी व्यक्तिगत आग्रह नहीं रखा। उनका मानना था कि देश की सेवा किसी पुरस्कार या लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म के निर्वहन के लिए की जानी चाहिए।
वर्ष 2000 में 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। अपने पीछे वे देशभक्ति, त्याग और संघर्ष की ऐसी विरासत छोड़ गए, जो आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। उनका जीवन संदेश था कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और देश से बढ़कर कुछ नहीं।
क्षेत्र के बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्व. सीताराम सिंह "बच्चा बाबू" की स्मृति में मेहनाजपुर में एक स्मारक अथवा प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से परिचित हो सकें।
स्व. सीताराम सिंह "बच्चा बाबू" को उनकी जयंती एवं पुण्य स्मृति पर शत-शत नमन।

रिपोर्ट विशेष आर.के. राजहंस

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