पहले इनकार फिर इकरार आखिर आजमगढ़ के अस्पतालों में क्या चल रहा है खेल रेनबो अस्पताल ने मानी नवजात बदलने की गलती कहा मानवीय भूल थी




संवाददाता जाबिर शेख 

आजमगढ़ : सिधारी स्थित रेनबो अस्पताल में नवजात बच्चे के बदलने को लेकर उठे विवाद के बाद आखिरकार अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। शुक्रवार को आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में अस्पताल प्रबंधन ने माना कि स्टाफ की “मानवीय भूल” के चलते नवजातों की टैगिंग में गड़बड़ी हुई, जिससे बच्चों की अदला-बदली जैसी स्थिति पैदा हो गई।
रोडवेज स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में रेनबो अस्पताल के प्रबंधक शशि पांडेय ने कहा कि बीते दो दिनों से सोशल मीडिया पर मामले को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल के एक कर्मचारी से गलती हुई थी, जिसके कारण नवजात की पहचान टैगिंग में त्रुटि हो गई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई सुनियोजित साजिश नहीं थी, बल्कि मानवीय चूक का मामला है।
घटना सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित स्टाफ को निलंबित कर दिया है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाओं को और मजबूत करने का दावा किया गया है।
प्रेसवार्ता के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर चल रही बच्चों की खरीद-फरोख्त और लेन-देन जैसी चर्चाओं को पूरी तरह भ्रामक बताया। प्रबंधक शशि पांडेय ने कहा कि अस्पताल केवल तथ्यात्मक जानकारी जनता के सामने रखना चाहता है और अफवाहों से बचने की अपील करता है।
वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मीडिया प्रभारी डॉ. सुभाष सिंह ने कहा कि मामले को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैल गई थीं, जिन्हें स्पष्ट करने के लिए प्रेसवार्ता की गई। उन्होंने अस्पतालों में सुरक्षा गार्ड और बाउंसर रखने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।
डॉ. सुभाष सिंह ने कहा कि कई बार मरीजों के परिजन आवेश में आकर अस्पतालों में हंगामा करने लगते हैं। कुछ मामलों में शराब के नशे में लोग अस्पताल पहुंचकर स्टाफ के साथ अभद्रता और मारपीट तक करते हैं। उन्होंने बताया कि एक मरीज को देखने के लिए कई बार 10 से 15 लोग एक साथ अस्पताल में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे अस्पताल संचालन प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में गार्ड रखने का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना होता है। यदि किसी स्टाफ या गार्ड के व्यवहार को लेकर शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
प्रेसवार्ता में आईएमए की ओर से डॉ. आसिफ और डॉ. अभिषेक सिंह भी मौजूद रहे।


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