संवाददाता अशोक वश्वकर्मा
आजमगढ़ बिंद्राबाज़ार गंभीरपुर थाना क्षेत्र के गौरी शिवराजपुर,जमालपुर, मदारपुर, मंगरावा रायपुर, गंभीरपुर, छाऊ, कमरावा, चिवटही, नेगवा, मुहम्मदपुर, मखदुमपुर, दयालपुर समेत अनेक जगह ईदगाह पर बृहस्पतिवार की सुबह 6:30पर ईद उल अजहा (बकरीद )की नमाज अदा की गई। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टिगत सभी ईदगाह पर पुलिस की तैनाती की गई थी।
उसी क्रम में गंभीरपुर ईदगाह पर हाफिज अबू सईद ने ईद उल अजहा (बकरीद )की नमाज अदा कराई।बकरीद की नमाज अदा करने के बाद लोग एक दूसरे को गले मिलकर बधाई दिए।नमाज अदा कराने के उपरांत हाफ़िज़ सईद ने कहा की बकरीद (ईद-उल-अज़हा) का त्यौहार पैगंबर हज़रत इब्राहिम द्वारा अल्लाह के प्रति दिखाए गए सर्वोच्च त्याग,समर्पण और अटूट विश्वास की याद में मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम की वफ़ादारी और प्रेम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी देने को कहा हज़रत इब्राहिम को अपने बेटे हज़रत इस्माइल से बहुत प्यार था, जो उन्हें बुढ़ापे में प्राप्त हुए थे फिर भी, अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया जब हज़रत इब्राहिम ने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह के हुक्म से उनके बेटे की जगह एक दुम्बा (भेड़ या बकरा) आ गया उनके बेटे को जीवनदान मिल गया और इब्राहिम की निष्ठा स्वीकार हो गई इस घटना के बाद से ही अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई यह त्यौहार केवल पशुओं की बलि देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने अहंकार के त्याग और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है इस दिन पूरा मुसलमान समाज सुबह की विशेष नमाज़ अदा करते हैं और अल्लाह की इबादत के बाद बकरे या अन्य जायज़ जानवर की कुर्बानी देते हैं कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है एक हिस्सा गरीबों व ज़रूरतमंदों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों/दोस्तों के लिए और तीसरा अपने परिवार के लिए होता है। वहीं स्थानीय पुलिस द्वारा प्रतिबंधित पशु न कटने पाए इसलिए घरों की तलाशी ली गई और सभी ईदगाह पर सुरक्षा की दृष्टिगत पुलिस और चौकीदार तैनात रहे। गंभीरपुर थाना अध्यक्ष अमित त्रिपाठी,संदीप दुबे पूरे क्षेत्र में भ्रमण करते हुए नजर आए।
Post a Comment