पत्रकारिता दिवस पर आलेख 30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस





शीर्षक लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता

30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से पहला हिंदी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' निकाला था। उसी की याद में हर साल 30 मई को 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है।

पत्रकारिता क्या है
पत्रकारिता सिर्फ खबर छापना नहीं है। ये समाज का आईना है। ये आवाज है उन लोगों की जिनकी आवाज दबा दी जाती है। पत्रकार वो सिपाही है जो कलम को हथियार बनाकर सच के लिए लड़ता है।

आज के दौर में पत्रकार की चुनौतियां

1. सच और झूठ की जंग सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें आग की तरह फैलती हैं। ऐसे में पत्रकार का काम और जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उसे 'पहले कौन' से ज्यादा 'सही कौन' पर ध्यान देना है।

2. दबाव और धमकी कई बार सच्ची खबर छापने पर पत्रकारों को धमकियां मिलती हैं। पर इतिहास गवाह है कि कलम जब सच्चाई से चलती है तो बड़ी-बड़ी सत्ता हिल जाती है।

3. तकनीक का बदलता रूप पहले अखबार थे, फिर टीवी आया, अब मोबाइल पर YouTube, Facebook, Instagram पर खबर है। पत्रकार को अब कैमरा, माइक और एडिटिंग सब आना चाहिए।

एक अच्छे पत्रकार के गुण

-निडरता बिना डरे सच लिखना

निष्पक्षता किसी का पक्ष न लेना, सिर्फ जनता का पक्ष लेना 

संवेदनशीलता पीड़ित की पीड़ा समझना

जिम्मेदारी खबर छापने से पहले 10 बार जांच करना

ए के सिंह परमहंस जैसे साथी पत्रकारों के नाम संदेश  
हम कलम के सिपाही हैं। हमारे एक शब्द से किसी का घर बस सकता है, एक खबर से भ्रष्टाचार की पोल खुल सकती है। इसलिए हमेशा याद रखिए - पत्रकारिता 'मिशन' है, 'कमीशन' नहीं।

हज यात्रा हो, राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि हो या गांव की टूटी सड़क - हर खबर जरूरी है। क्योंकि खबर ही लोकतंत्र की ऑक्सीजन है।

अंत में
पत्रकारिता दिवस पर सभी कलम के साथियों को शुभकामनाएं। आपकी कलम यूं ही चलती रहे, सच बोलती रहे।

जय हो कलम रहे जिंदाबाद 

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रिपोर्ट विशेष शुभाष शाश्त्सं जय त्रिपाठी


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