शाहजहांपुर (मदनापुर)। शेर की मांद में हाथ डालने की कोशिश जब गीदड़ करते हैं, तो अंजाम क्या होता है, यह शाहजहांपुर पुलिस ने पंखाखेड़ा के अपराधियों को समझा दिया है। कानून को ठेंगे पर रखने वाले और खाकी पर धारदार हथियार से हमला करने वाले राजिश खां और उसके परिवार की गुंडागर्दी अब जेल की कालकोठरी में सिसक रही है।
मदनापुर थाने के जांबाज दरोगा मोहित कुमार और उनकी टीम तो महज एक वारंटी को पकड़ने गई थी, लेकिन अपराधी राजिश खां के दिमाग पर खून सवार था। उसने न सिर्फ दरोगा की जांघ पर नुकीले हथियार से आर-पार वार किया, बल्कि सरकारी वर्दी फाड़कर सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को चुनौती दे डाली। अपराधी ने दहाड़ते हुए कहा था कि पुलिस को जान से मारना होगाशायद वह भूल गया था कि पुलिस जब पलटवार करती है, तो फिर पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
अपराधियों को लगा होगा कि पुलिस डर कर लौट गई है, लेकिन असली पिक्चर अभी बाकी थी। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल ने गांव की घेराबंदी की। जो गुंडे चंद घंटे पहले दरोगा को मारने की धमकी दे रहे थे, पुलिस की गाड़ियों के सायरन सुनते ही उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। राजिश खां और उसके कुनबे को पुलिस ने घर के भीतर से खींचकर निकाला और अब उनकी जगह वहीं है जहां उत्तर प्रदेश के अपराधियों की होनी चाहिए— सलाखों के पीछे...
सीओ सदर प्रयांक जैन ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। जानलेवा हमले जैसी संगीन धाराओं में केस दर्ज कर अपराधियों का ऐसा इलाज किया जा रहा है कि आने वाले कई सालों तक कोई खाकी की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं करेगा।
अजय सिंह की रिपोर्ट शाहजहांपुर
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