संवाददाता सलीम खान
आजमगढ़ कोतवाली क्षेत्र के बलरामपुर गांव निवासी शिवमूरत प्रजापति ने मारपीट, तोड़फोड़ और जान से मारने की धमकी के मामले में मुकदमा दर्ज न होने पर न्यायालय की शरण ली है। वादी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आजमगढ़ की अदालत में परिवाद संख्या 2304/2025 के तहत धारा 173(4) बीएनएसएस के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रार्थना पत्र के अनुसार, घटना 16 नवंबर 2025 की दोपहर करीब 3 बजे की है। शिवमूरत प्रजापति का आरोप है कि वह अपने अहाते में बाथरूम का निर्माण कार्य करा रहे थे, तभी गांव के रवि प्रजापति, हरखू प्रजापति, प्रमिला और कविता समेत कुछ अज्ञात लोग लाठी-डंडों से लैस होकर उनके दरवाजे पर पहुंचे। जमीनी रंजिश को लेकर गाली-गलौज करते हुए आरोपियों ने ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। वादी का कहना है कि जब उन्होंने विरोध किया तो आरोपी घर में घुस आए और उनके साथ-साथ पत्नी चंपा देवी, बेटे आशीष व अन्य परिजनों को मारापीटा। मारपीट में पत्नी और बेटे को गंभीर चोटें आईं तथा घर का कीमती सामान भी तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीणों के जुटने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। घटना के बाद वादी घायलों को लेकर कोतवाली पहुंचे। आरोप है कि पुलिस के कहने पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया और 17 नवंबर को डॉक्टरी मुआयना कराया गया। वादी का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट कोतवाल ने अपने पास रख ली और बाद में कार्रवाई करने के बजाय उन्हें टालते रहे। शाम तक बैठाए रखने के बाद यह कहकर भगा दिया गया कि “कुछ नहीं होगा, विपक्षी प्रभावशाली हैं।” वादी ने बताया कि 19 नवंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री के माध्यम से शिकायत भेजी गई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने से आहत होकर शिवमूरत प्रजापति ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की है। वादी ने अदालत से निवेदन किया है कि कोतवाली, जिला आजमगढ़ को निर्देशित किया जाए कि आरोपियों के खिलाफ समुचित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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