मुलुंड: जाली केवाईसी कर पुलिस स्टेशन के खाते से उड़ाए 33 लाख


संवाददाता,,,नफीस खान 

मुंबई: मुलुंड में एक बैंक के एक पूर्व संविदा कर्मचारी को मंगलवार को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब एक कांस्टेबल को 20 साल पहले के एक मामले के सिलसिले में पुलिस स्टेशन के खाते में 33 लाख से ज्यादा रुपए में केवल 32 रुपये शेष मिले।

पुलिस ने अब तक बैंक में काम करने वाले विनोद सिंह द्वारा फर्जी केवाईसी दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग खातों में उड़ाए गए रुपियो में से 22 लाख रुपये बरामद कर लिए हैं। वे धोखाधड़ी में उसकी पत्नी की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं।

इस मामले में नवघर पुलिस स्टेशन पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई। अधिकारियों ने कहा कि एक विभागीय जांच शुरू की जाएगी क्योंकि हर स्टेशन में एक पैरावी अधिकारी' होता है जिसे विभिन्न अदालतों में हर मामले के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय करने का काम सौंपा जाता है।

वर्ष 2003 में धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में आरोपी से 16.8 लाख रुपये वसूले गए थे और वरिष्ठ निरीक्षक लक्ष्मण खारपड़े के नाम पर 2004 में देना बैंक (अब बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय) में एक खाता खोला गया था। एफआईआर में कहा गया है कि पिछले साल मुद्देमाल करकुन राणे ने पासबुक को अपडेट किया था और इसमें दिखाया गया था कि राशि बढ़कर 32 लाख रुपये हो गई है। इस बार जब उन्होंने इसे अपडेट कराया तो बैलेंस 32 रुपये दिखा।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा हमारे कांस्टेबल ने धोखाधड़ी का पता लगाया और तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सतर्क कर दिया। हमने धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्वास का उल्लंघन, आपराधिक साजिश का अपराध दर्ज किया और पैसे के लेन-देन की जांच शुरू कर दी।

क्योंकि पुलिस ने पाया कि खाता 28 मार्च 2023 को केवाईसी दस्तावेज जमा करके सक्रिय किया गया था। खरपड़े का बयान भी दर्ज किया गया था लेकिन विस्तृत बैंक स्टेटमेंट और बैंक के सीसीटीवी फुटेज के अध्ययन से पुलिस विनोद सिंह तक पहुंच गई।

पुलिस उपायुक्त (जोन 7) पुरषोत्तम कराड ने कहा कि सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और 22 लाख रुपये बरामद किए गए। आगे की जांच जारी है और सिंह की पत्नी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

राणे को खबर लगने के बाद गिराप अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ बैंक पहुंचे और लेनदेन के तबादलों का अध्ययन किया। पता चला कि खारपड़े होने का दावा करने वाला एक व्यक्ति 10 मई को बैंक आया जाली केवाईसी जमा किया और चेक द्वारा 5.1 लाख रुपये निकाल लिए। बाद में उसने 28 लाख रुपये दूसरे बैंक के विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर दिए जो सिंह की पत्नी के नाम पर थे।

पुलिस को पता चला कि बैंक शाखा में अपने कार्यकाल के दौरान सिंह के पास सभी गैर-परिचालन खातों के डेटाबेस तक पहुंच थी। सिंह ने पुलिस को बताया कि उसने पहले केवाईसी के लिए खारपड़े के नाम पर जाली आधार और पैन कार्ड जमा किए और फिर पैसे को दूसरे बैंक में स्थानांतरित कर दिया और पैसे निकाल लिए।

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