अजीजनबाई अजीजनबाई 19 वीं शताब्दी की भारत की एक पेशेवर नर्तकी थीं । उनको 'अजीजुन निशा' नाम से भी जाना जाता था। वे पेशे से तवायफ (वेश्या) थीं किन्तु 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसमें उन्होंने ब्रितानी शासन के विरुद्ध गुप्तचर वीरांगना का कार्य किया एवं क्रांतिकारियों की सहायता की। इस कारण अंग्रेज सरकार ने उन्हें मृत्युदण्ड दे दिया था।
अजीजनबाई ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए उसने घुंघरू उतार दिए थे। रसिकों की महफिलें सजाने वाली अजीजन क्रांतिकारियों के साथ बैठके कर रणनीतियां बनाने लगी थीं। कानपुर में नाना साहेब के आह्वान पर अजीजन ने फिरंगियों से टक्कर लेने के लिए स्त्रियो का सशस्त्र दल गठित किया एवं उसकी कमान संभाली।
परिचय
एक जून 1857 को क्रांतिकारियों ने कानपुर में एक बैठक की, इसमें नाना साहब, तात्या टोपे के साथ सूबेदार टीका सिंह, शमसुद्दीन खां और अजीमुल्ला खां के अलावा अजीजन बाई ने भी हिस्सा लिया। यहां गंगाजल को साक्षी मानकर इन सबने अंग्रेजों की हुकूमत को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया।
जून 1857 में ही इन लोगों ने अंग्रेजों को जोरदार टक्कर देते हुए विजय प्राप्त क
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