बिना पंजीकरण धड़ल्ले से चल रहा था अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग ने मारा छापा तो खुली पोलपूर्वांचल अस्पताल सील, कार्रवाई के साथ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे गंभीर सवाल




संवाददाता जाबिर शेख 

आजमगढ़। जिले में बिना पंजीकरण और मानकों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे कथित अवैध अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बिलरियागंज-रौनापार बॉर्डर क्षेत्र के करमैनी गांव में शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूर्वांचल अस्पताल पर छापा मारकर उसे सील कर दिया। जांच में अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण नहीं पाया गया।
शिकायत के आधार पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। आरोप था कि अस्पताल में निर्धारित चिकित्सकीय योग्यता रखने वाले चिकित्सकों के माध्यम से गंभीर मरीजों का उपचार और ऑपरेशन तक किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान पंजीकरण समेत कई अनियमितताएं सामने आने के बाद उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मोहन लाल की मौजूदगी में अस्पताल को तत्काल सील कर दिया गया। विभाग ने मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।
कार्रवाई हुई, 

लेकिन बड़ा सवाल शिकायत का इंतजार क्यों

पूर्वांचल अस्पताल पर हुई कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। आखिर बिना पंजीकरण कोई अस्पताल लंबे समय तक संचालित कैसे होता रहा? क्या स्वास्थ्य विभाग के पास जिले में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और चिकित्सा संस्थानों की नियमित जांच की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
यदि अस्पताल में गंभीर मरीजों का उपचार और ऑपरेशन किया जा रहा था तो विभाग की निगरानी टीम को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी? क्या स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ शिकायत मिलने के बाद ही शुरू होगी? यदि कोई शिकायत न करे तो क्या ऐसे अस्पताल इसी तरह मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहेंगे?
आजमगढ़ जिले में समय-समय पर बिना पंजीकरण, मानकों की अनदेखी और कथित अवैध तरीके से संचालित चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब विभाग के पास अस्पतालों के पंजीकरण और मानकों की जानकारी उपलब्ध है, तो नियमित निरीक्षण और निगरानी क्यों नहीं की जाती?

आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक

स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ता है। किसी अस्पताल में चिकित्सकीय योग्यता, पंजीकरण और जरूरी मानकों का पालन नहीं होने की स्थिति में उपचार कराने वाले मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
पूर्वांचल अस्पताल पर कार्रवाई के बाद अब जरूरत केवल एक अस्पताल को सील करने तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि पूरे जिले में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक और ऑपरेशन सेंटरों की व्यापक जांच कराने की है। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि कितने चिकित्सा संस्थान पंजीकृत हैं और कितने बिना वैध अनुमति या निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं।
जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे या शिकायत के बाद ही जागेगा? शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समय रहते ऐसे संस्थानों की पहचान कर आम जनता को सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है।
अब देखना यह है कि पूर्वांचल अस्पताल को सील करने के बाद स्वास्थ्य विभाग जिले के अन्य संदिग्ध और बिना पंजीकरण संचालित चिकित्सा संस्थानों की भी जांच करता है या फिर यह कार्रवाई भी शिकायत तक ही सीमित रह जाती है।
कार्रवाई करने वाली टीम में उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मोहन लाल, वरिष्ठ सहायक चिकित्साधिकारी धीरेन्द्र शुक्ला तथा जिला अस्पताल के सहायक कम्प्यूटर ऑपरेटर बृजेश सिंह शामिल रहे।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बिना पंजीकरण अथवा नियमों के विपरीत चिकित्सा संस्थान संचालित किए जाने की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

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