संवाददाता मोहम्मद साकिब
रांची/वाराणसी। प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) के प्रमुख कमांडर बताए जा रहे बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह के वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की निगाह अब संगठन के बचे हुए नेटवर्क पर टिक गई है। बृजेश लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित बताया जाता था। उस पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से पांच लाख रुपये का इनाम घोषित होने की बात सामने आई है।
टेरर फंडिंग से लेकर लेवी वसूली तक जांच का दायरा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, टीएसपीसी से जुड़े मामलों में कोयला कारोबार, परिवहन और ठेकेदारी से जुड़े लोगों से कथित लेवी वसूली के आरोप सामने आते रहे हैं। एनआईए भी बृजेश से जुड़े कथित टेरर फंडिंग मामलों की जांच कर रही थी। अब उसकी मौत के बाद एजेंसियां संगठन के वित्तीय स्रोतों, संपर्क सूत्रों और बचे हुए नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं।
बृजेश के बाद किसके हाथ में कमान?
बृजेश गंझू की मौत के बाद टीएसपीसी के बचे हुए ढांचे में नेतृत्व को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगाह पलामू निवासी शशिकांत गंझू पर भी है। एजेंसियों के अनुसार शशिकांत को संगठन का सक्रिय कमांडर बताया जाता है और उस पर झारखंड सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पलामू, चतरा, लातेहार, गढ़वा और हजारीबाग समेत कई जिलों में उसके खिलाफ मामले दर्ज बताए जाते हैं।
मुठभेड़ों से बच निकलने का भी दावा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शशिकांत कई वर्षों से सुरक्षा बलों की नजर में है और अलग-अलग अभियानों के दौरान उसके बच निकलने की जानकारी सामने आती रही है। सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में भी उसके बच निकलने की बात कही गई थी। इस घटना में दो पुलिसकर्मियों के शहीद होने की जानकारी सामने आई थी।
अब नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के बचे हुए कैडर, संपर्क सूत्रों और कथित वित्तीय नेटवर्क की पहचान करना है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संगठन से जुड़े कौन-कौन लोग अभी सक्रिय हैं और उनका आपसी संपर्क किस तरह बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में भी टीएसपीसी से जुड़े लोगों की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क रही हैं। वर्ष 2025 में पलामू से फरार बताए गए टीएसपीसी कमांडर नगीना को वाराणसी में पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। पूछताछ में उसके कथित संपर्कों और उत्तर प्रदेश में आवाजाही से जुड़ी जानकारियां सामने आने का दावा किया गया था।
एक कमांडर के खात्मे के बाद भी चुनौती बरकरार
बृजेश गंझू की मौत को सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन संगठन के बचे हुए नेटवर्क को लेकर निगरानी अब और बढ़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों का फोकस अब सक्रिय सदस्यों, हथियारों, संपर्क सूत्रों और कथित लेवी व टेरर फंडिंग से जुड़े स्रोतों तक पहुंचने पर है।
हालांकि, मामले से जुड़े कई दावे जांच एजेंसियों और पुलिस सूत्रों पर आधारित हैं। इनके संबंध में अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
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