रामपुर उत्तर प्रदेश जिस पिता ने अपनी पूरी जवानी बच्चे का भविष्य संवारने में लगा दी, आज वही बुढ़ापे में सड़क पर जीवन बिताने को मजबूर है। यह दर्दनाक तस्वीर रामपुर से सामने आई है और हर उस व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करती है, जो अपने माता-पिता के त्याग को समय के साथ भूल जाता है।स्थानीय लोगों के अनुसार, वृद्ध *वेद प्रकाश रस्तोगी* इन दिनों रामपुर जिला अस्पताल के पास एक चबूतरे पर जीवन गुजार रहे हैं। तिलक कॉलोनी के लोग उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। काफी प्रयासों के बाद उनकी पहचान हुई और पता चला कि वे कभी अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन बिताते थे।
आरोप है कि बेटे संजय रस्तोगी के मोह में उनकी सारी संपत्ति बिक गई और अब वे बेसहारा हैं। यह भी आरोप लगा है कि बेटे ने वृद्ध पिता के साथ अभद्र व्यवहार किया। हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। जिस बेटे संजय रस्तोगी पर आरोप लगाए जा रहे हैं, पूर्वी संसार द्वारा उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया। रामपुर नगर के माला टॉकीज के पास संजय टेलर के नाम से उनकी दुकान है, वहां भी जाकर संपर्क की कोशिश की गई, पर कोई जवाब नहीं मिला।जांच में पता चला कि संजय रस्तोगी शराब के आदी हैं और अपनी नाजायज इच्छाओं को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने पिता का मकान तक बेच दिया। इसके बाद पिता को घर से भी निकाल दिया। कई बार लोगों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने बूढ़े पिता को साथ रखने से बिल्कुल मना कर दिया।
यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जिस पिता ने अपने बच्चों को चलना सिखाया, उन्हें पढ़ाया-लिखाया और अपने सपनों का त्याग कर उनका भविष्य बनाया, वही पिता आज बुढ़ापे में अपमान, उपेक्षा और बेबसी का जीवन जीने को मजबूर है। यह पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है।
रिपोर्ट विशेष ए के सिह.
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