गोरखपुर में बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना ने पूरे प्रदेश की पुलिस की छवि पर दाग लगा दिया है। दरिंदे सिपाही ने हवस का शिकार बनाकर मासूम की जान ले ली, लेकिन भविष्य में इस तरह की घटना न होने पाए, इसे लेकर पुलिस मुख्यालय ने कवायद शुरू कर दी है। इस केस को आधार मानते हुए पुलिस मुख्यालय ने वर्दी की आड़ में अपराध करने वाले और संदिग्ध छवि वाले पुलिसकर्मियों की पहचान के लिए अभियान शुरू किया है। हर जिले में ऐसे पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है, जिनके खिलाफ आपराधिक केस, भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न, अनुशासनहीनता या अन्य गंभीर आरोप दर्ज हैं।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिलों में पुलिसकर्मियों की सेवा पुस्तिका, विभागीय जांच, लंबित शिकायतें और दर्ज आपराधिक मामलों की समीक्षा की जा रही है। जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर आरोप या मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें चिह्नित कर वर्दी पर लगे दाग मिटाने को हर जिले में खंगाले जा रहे पुलिसकर्मियों के रिकॉर्ड गोरखपुर कांड के बाद संदिग्ध छवि वाले कर्मियों पर होगी कार्रवाई
उनकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारियों से हटाने और विभागीय कार्रवाई तेज करने की भी तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, उद्देश्य केवललंबित मामलों की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में किसी ऐसे पुलिसकर्मी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न मिले, जिसकी छवि संदिग्ध हो।
मिडिया रिपोर्ट एम एस जाविर.
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