संवाददाता जाबिर शेख
आजमगढ़। जिले में संचालित सोनोग्राफी एवं डायग्नोस्टिक सेंटरों पर अब स्वास्थ्य विभाग की सख्ती बढ़ने जा रही है। सोमवार को सीएमओ सभागार में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एनआर वर्मा की अध्यक्षता में जिला सलाहकार समिति पीसीपीएनडीटी की बैठक में सेंटरों की निगरानी और नियमों के अनुपालन को लेकर कई अहम फैसले लिए गए।
बैठक में प्यारी बिटिया पोर्टल पर पंजीकरण, नवीनीकरण और नियम-13 के तहत प्राप्त आवेदनों समेत विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। सीएमओ ने जिले के सभी सोनोग्राफी एवं डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर सेंटर के प्रमुख स्थान पर नामित चिकित्सक की बड़ी फोटो, नाम और डिग्री प्रदर्शित करना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।
15 दिन बाद शुरू होगी बड़ी जांच
सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा ने साफ चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी के निर्देशन में गठित जांच टीम जिलेभर के अल्ट्रासाउंड सेंटरों की व्यापक जांच करेगी। जांच के दौरान यदि नियमों का उल्लंघन मिला या नामित चिकित्सक के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जाता पाया गया तो संबंधित सेंटर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सेंटर सीज करने के साथ ही संचालक और नामित चिकित्सक के खिलाफ विधिक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है।
क्यों हो रही है इतनी सख्ती?
समिति के सदस्य एवं जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि भ्रूण के लिंग निर्धारण के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के दुरुपयोग और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से पीसीपीएनडीटी अधिनियम वर्ष 1994 में लागू किया गया था। इसी कानून के तहत अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाता है।
बैठक में इन मामलों की भी हुई जांच
बैठक के दौरान पांच डायग्नोस्टिक सेंटरों के नवीनीकरण, नौ नए पंजीकरण तथा पांच चिकित्सकों के परिवर्तन से संबंधित पत्रावलियों की विभिन्न बिंदुओं पर जांच की गई।
बैठक में समिति के सदस्य एसके विमल, मंडलीय जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ सहित अन्य सदस्य, अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक और नामित चिकित्सक मौजूद रहे।
अब निगाहें 15 दिन बाद होने वाली जांच पर टिकी हैं। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में कितने सेंटर मानकों पर खरे उतरते हैं और कितनों पर गाज गिरती है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा।
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