प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और वकीलों के आपराधिक गठजोड़ पर रोक लगाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने कहा है कि जिन अधिवक्ताओं के खिलाफ सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनके मामलों की सुनवाई उनके गृह जिले के बजाय किसी निकटवर्ती अन्य जिले की अदालत में कराई जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि निष्पक्ष न्याय व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि ऐसे मामलों की सुनवाई स्थानीय प्रभाव से मुक्त वातावरण में हो।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कानून के शासन पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, "कानून दो बार मरता है— पहली बार तब, जब उसके अधिकारी अपराधी बन जाते हैं और दूसरी बार तब, जब न्यायाधीश न्यायिक साहस दिखाने के बजाय चुप्पी साध लेते हैं।"
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी और निर्देश को न्यायिक पारदर्शिता तथा निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मिडिया रिपोर्ट एम एस जाविर..
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