संवाददाता मोहम्मद यासिर
आजमगढ़ सरायमीर। कर्बला के शहीद हज़रत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले ग़म के महीने मोहर्रम के इस्तक़बाल को लेकर नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के इमामबाड़ों, अज़ाखानों और इमाम चौकों पर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। विभिन्न स्थानों पर साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट का कार्य पूरा कर लिया गया है। मोहर्रम के दौरान आयोजित होने वाली मजलिसों और मातमी कार्यक्रमों को देखते हुए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं।
शिया कमेटी के मीडिया प्रभारी सैय्यद मोहम्मद हुसैन ने बताया कि मोहर्रम का महीना हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को याद करने का महीना है, जो इंसानियत, सब्र और सच्चाई का पैगाम देता है।
मोहर्रम के आगमन को लेकर अकीदतमंदों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अलम, ताज़िया और अन्य धार्मिक प्रतीकों को व्यवस्थित किया जा रहा है, जबकि अज़ाखानों में फ़र्श बिछाकर मोमिनीन के बैठने की व्यवस्था की गई है। शाम होते ही विभिन्न इमामबाड़ों और अज़ाखानों में मजलिसों का सिलसिला शुरू होगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शिरकत कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश करेंगे।
18 जून को निकलेगा पहला मातमी जुलूस
मीडिया प्रभारी सैय्यद मोहम्मद हुसैन ने जानकारी दी कि हज़रत इमाम हुसैन के 2 मोहर्रम को कर्बला पहुंचने की याद में 18 जून (गुरुवार) सुबह 10 बजे सरायमीर सिरादीपूरा स्थित अज़ाखाना ज़हरा से मजलिस के बाद शबीह ज़ुलजनाह व अलम के साथ पहला मातमी जुलूस निकलेगा। यह जुलूस रौज़ा अली आशिकान, पुराना थाना होते हुए चौक स्थित अज़ाखाना अबु तालिब पहुंचकर सम्पन्न होगा। जुलूस में क्षेत्रीय अंजुमनों के साथ बाहरी अंजुमनें भी शिरकत करेंगी।
Post a Comment