गाजीपुर बिजली व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए बिजली निगम ने पिछले तीन वर्षों में 54 करोड़ रुपये खर्च किए। निगम का दावा है कि जिले में हजारों किलोमीटर जर्जर तार बदले गए और हजारों नए बिजली खंभे लगाए गए। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। जिले के कई इलाकों में आज भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली के तार खींचे गए हैं, जिससे मानसून से पहले बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई है।
आरडीएसएस (पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना) के तहत वर्ष 2022 से 2025 के बीच जिले में 2553 किलोमीटर बिजली तार बदले गए। इसके अलावा 16,831 सामान्य खंभे, 5,350 ग्यारह हजार वोल्ट के खंभे और 687 खंभे 33 केवी लाइन के बदले जाने का दावा किया गया। इसके बावजूद कई गांवों में बिजली आपूर्ति अस्थायी और जोखिमपूर्ण व्यवस्था के सहारे जारी है।
परवा में डेढ़ किलोमीटर तक बांस-बल्ली पर टिकी बिजली
परवा गांव में करीब डेढ़ किलोमीटर तक बिजली के तार बांस-बल्ली के सहारे लटक रहे हैं। जर्जर तारों में तेज हवा के दौरान स्पार्किंग होती है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
जगदीशपुर विद्यापति में 11 हजार वोल्ट लाइन पर खतरा
जगदीशपुर विद्यापति क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट की लाइन बांस-बल्ली के सहारे चल रही है। हाल के दिनों में कई बार आंधी आ चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और तेज हवा में यदि बांस-बल्ली उखड़ गए तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
करंट से जा चुकी हैं कई जानें
जिले में करंट से होने वाली मौतों के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं।
• वर्ष 2026 में मुहम्मदाबाद के हुस्सेपुर में युवक की करंट लगने से मौत।
• मई 2026 में नंदगंज के सौरम मोड़ पर युवक की करंट से मौत।
• मई 2025 में सैदपुर के महमूदपुर हथिनी में युवक की मौत।
• मई 2025 में मरदह के नरवर गांव में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से चार लोगों की दर्दनाक मौत।
ग्रामीणों में नाराजगी
मड़ही निवासी धर्मेंद्र यादव* ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति होना निगम की बदहाल व्यवस्था को उजागर करता है।
अनिल यादव का कहना है कि निगम केवल बिल वसूली पर ध्यान देता है, लेकिन जर्जर व्यवस्था को सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाता।
वहीं विशाल सिंह ने बताया कि बांस-बल्ली के सहारे खींचे गए तार न केवल हादसों का कारण बन सकते हैं, बल्कि लोकल फॉल्ट और बिजली कटौती की समस्या भी बढ़ाते हैं।
क्या बोले अधिकारी
अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड जंगीपुर पीके तिवारी* ने कहा कि निगम लगातार नए बिजली खंभे लगा रहा है। जिन स्थानों पर अभी भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है, उन्हें चिन्हित कर खंभे लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
मानसून की दस्तक से पहले सवाल यही है कि 54 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी आखिर कब तक जिले के लोग बांस-बल्ली के भरोसे बिजली और अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे
मिडिया रिपोर्ट एस एम जाबिर
Post a Comment