आजमगढ़। अतरौलिया क्षेत्र से जुड़े मानवाधिकार आयोग प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी विस्तृत जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित कर दी है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने बताया कि शिकायतकर्ता विरेंद्र मौर्य पुत्र प्रहलाद मौर्य निवासी ग्राम एवं पोस्ट गोंठीपुर, अतरौलिया द्वारा उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत के क्रम में यह जांच कराई गई।
सीएमओ ने बताया कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों, संबंधित स्थल की वर्तमान स्थिति, पंजीकरण अभिलेखों तथा उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों का गहन परीक्षण किया गया। जांच समिति द्वारा स्थलीय निरीक्षण में यह पाया गया कि अतरौलिया बाजार क्षेत्र में “जय गुरुदेव हड्डी अस्पताल” नाम से वर्तमान में कोई चिकित्सालय अथवा क्लीनिक संचालित नहीं हो रहा है। समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित प्रतिष्ठान को पूर्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा नियमानुसार सील किया जा चुका था।
निरीक्षण के दौरान उक्त स्थल पर “अनामी अर्थो क्लीनिक” संचालित पाया गया, जिसके द्वारा सामान्य ओपीडी संचालन हेतु सक्षम कार्यालय से जारी पंजीकरण अभिलेख प्रस्तुत किए गए। जांच के समय क्लीनिक पर एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. सत्येंद्र कुमार की उपस्थिति भी पाई गई। समिति ने स्पष्ट किया कि उक्त क्लीनिक सामान्य ओपीडी सेवाओं हेतु पंजीकृत है।
जांच आख्या में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए कुछ आरोप मेडिकल स्टोर संचालन, दवा लाइसेंस एवं औषधि संबंधी मामलों से जुड़े हैं, जिनकी जांच औषधि विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। इस संबंध में संबंधित विभाग से आवश्यक रिपोर्ट एवं तथ्य प्राप्त किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने कहा कि शिकायत में वर्णित चिकित्सकीय उपचार, कथित लापरवाही एवं अन्य गंभीर बिंदुओं की उपलब्ध अभिलेखों और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर पृथक समीक्षा की जा रही है। यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय मानकों के उल्लंघन अथवा अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पीड़ित परिवार की संवेदनाओं के प्रति पूरी तरह गंभीर एवं संवेदनशील है तथा जनपद में सुरक्षित, पारदर्शी एवं मानकयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निजी चिकित्सालयों, क्लीनिकों एवं मेडिकल प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा।
गौरतलब है कि इस प्रकरण की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अब्दुल अज़ीज़, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी (निजी चिकित्सा प्रतिष्ठान) डॉ. आलेंद्र कुमार तथा जिला प्रशासनिक अधिकारी दिलीप प्रदीप सिंह को नामित किया गया था।
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