मंडलीय जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर पर निजी अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा



संवाददाता जाबिर शेख 

आजमगढ़ जिले में इलाज में गंभीर लापरवाही का एक मामला सामने आया है मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र के सहुवारी गांव निवासी राजेश यादव ने थाना सिधारी में तहरीर देकर एक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जो वर्तमान में मंडलीय जिला अस्पताल में तैनात हैं पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तहरीर के अनुसार, राजेश यादव के पुत्र नितीश यादव का सड़क दुर्घटना में दाहिने पैर का घुटना टूट गया था। इसके बाद उसे नरौली स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 1 जनवरी 2026 को मंडलीय जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर विनोद कुमार द्वारा उसका ऑपरेशन किया गया।
आरोप है कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान प्लेट लगाने की बात कही थी, लेकिन उसकी जगह पतली रॉड (वायर) डाल दी गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि ऑपरेशन के लिए उनसे करीब 1 लाख 46 हजार 500 रुपये लिए गए।
करीब 41 दिन बाद जब रॉड निकाली गई, तो पैर काला पड़ चुका था और ठीक से मुड़ भी नहीं पा रहा था। बाद में कराए गए एक्स-रे में पता चला कि हड्डी सही तरीके से जुड़ी ही नहीं थी। पीड़ित के पिता का आरोप है कि जब उन्होंने दोबारा इलाज और खर्च को लेकर डॉक्टर से बातचीत की, तो डॉक्टर ने अभद्र व्यवहार किया और उन्हें वहां से भगा दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
इसके बाद पीड़ित ने अन्य अस्पतालों में इलाज कराया, जिसमें लगभग 95 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हुए, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर की लापरवाही के चलते युवक का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है और वह अपंगता की ओर बढ़ रहा है।
पुलिस का कहना है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है कि मंडलीय जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर द्वारा निजी अस्पताल में ऑपरेशन किए जाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी प्रैक्टिस किए जाने पर प्रतिबंध के बावजूद इस तरह के आरोप विभागीय निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।

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