माता-पिता ने कड़ी मेहनत की, दोनों बेटों को पढ़ाया और विदेश भेजा, फिर जब बेटों ने अपना व्यवसाय स्थापित किया, तो उन्होंने अपने माता-पिता को अपने पास बुलाया और हवाई अड्डे पर उनके माता-पिता के स्वागत का दृश्य, ऐसा ही स्नेह और सम्मान मां पिता के प्रति रहे तो कोई भी माता पिता कभी वृद्धा आश्रम में नही होंगे, क्योंकि आप आप अपने माता पिता को इतना दिल से सम्मान करेंगे तो किसी पत्नी की कोई हिम्मत नही वो आपके माता पिता को सम्मान ना दे, हां लेकिन अपना ही सिक्का खोटा हो तो दूसरों पे उंगली उठाना बेकार है। सादर समर्पित माता पिता के चरणों में🙏 सेवा जोहार
एक विशेष रिपोर्ट
साभार
ए के सिंह ।
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