रमज़ान का पाक महीना आज से शुरू, लोगो ने आज रखा पहला रोज़ा

                     हाफ़िज़ नियामत ब्यूरो चीफ 

मछलीशहर जौनपुर: इस्लाम धर्म में रमजान मुबारक का महीना बहुत ही मुबारक (अच्छा)माना जाता है, रमजानुल मुबारक के महीने का पहला रोज़ा आज 12 मार्च 2024 से शुरू हो चुका है रोजेदारों ने सहरी खाकर पहला रोजा रखा है। बताते चले लोग चांद देखने के बाद ही रमजान की तैयारी में जुट जाते हैं सहरी और ईफ्तार के लिए बाजारों से सामान खरीदते है,और ईशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज में लग जाते हैं ।

पूरे एक महीने तक इस महीने में रोजेदार रोजा रखते हैं और तरवीह की नमाज अदा करते हैं । इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह इस्लाम धर्म का 9वां महीना माना जाता है। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरा रमजान रोजा रखते हैं, हदीस का मफहूम है,पाबंदी के साथ नियमित तौर-तरीके से रोजा रखने नमाज़ पढ़ने और तरावीह अदा करने पर अल्लाह पाक सारी दुआएं कबूल करते हैं।

बताते चलें कि रमजान के पाक महीने में मुस्लिम लोग रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं. रोजा रखने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले सेहरी खाते हैं, जिसके बाद तय समय के अनुसार रोजा शुरू हो जाता है. शाम को इफ्तार के समय रोजा खोल दिया जाता है। 

भारत राजधानी दिल्ली के समय अनुसार, पहले दिन यानी मंगलवार को सेहरी का समय सुबह 5 बजकर 18 मिनट समाप्त हो जाएगा. वहीं इफ्तार शाम 6 बजकर 27 मिनट पर किया जाएगा. पहला रोजा करीब सवा 13 घंटे का रहेगा. 

हालांकि, रमजान में सेहरी और इफ्तार का समय हर शहर और देश के हिसाब के समय अनुसार ही होता है. इसलिए हर जगह के लिए अलग-अलग कैलेंडर होते हैं जिसके अनुसार ही सेहरी और इफ्तार का समय तय होता है. अगर मछलीशहर नगर की बात की जाए तो वहां पहले दिन सहरी 04:57 इफ्तार का समय शाम 06 बजकर 09 मिनट मदरसे के कैलेंडर में दिया गया है तो और शहर इलाके का समय वहां के कैलेंडर के हिसाब से इससे थोड़ा अलग हो सकता है ।
बता दें कि इस्लाम में रोजा रखना हर बालिग इंसान पर फर्ज होता है.इस्लाम के फराइज़ यानि मूलभूत सिद्धांतों में से एक रोजा रखना भी कहा गया है. इस्लाम के अनुसार, सभी मुस्लिमों के लिए फराइज पांच सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है. इन पांच सिद्धांतों में नमाज, हज, जकात (दान), रोजा और तौहीद शामिल है. खास बात है कि रोजा रखना बेशक सभी पर फर्ज है लेकिन कुछ मामलों में छूट भी दी गई है उसको मोहल्ले के आलिम से पूछ कर मसला जानना चाहिए ।

*अपील अगर आप रोजा रख रहे हैं तो इन नियमों का रखें ध्यान*

इस्लाम धर्म के मुताबिक रमजान का रोजा पूरे एक महीने तक रखा जाता है, जब तक रमजान चलता है।
रोजा रखते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए, रमजान के वक्त रोजेदार को कुछ भी नहीं खाना चाहिए। 
सहरी के समय ही सिर्फ रोजेदार सुबह के समय खा सकते हैं, इस वक्त खजूर, दही, ड्राई फ्रूट्स जैसे पौषक तत्व वाली चीजें खाना चाहिए। 
रोजा रखने का मतलब यह नहीं होता है की भूखे-प्यासे रहें, बल्कि इस दिन तन-मन से भी पाक होना जरूरी होता है, इस दौरान रोजेदार को अच्छी बात अपनानी चाहिएं, मन में कोई भी बुरी भावना नहीं रखनी चाहिए।
रोजेदार को रमजान के पूरे महीने कुरान पढ़ना चाहिए और पांचों समय की नमाज अदा करनी चाहिए।
रोजा रखने वालों को झूठ बालने से बचना चाहिए, वरना रोजा रखने का फायदा नहीं माना जाता है।
रोजा रखने वाले को गरीब और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए, उन्हें खाने के लिए कुछ देना चाहिए। इसी के साथ रोजा रखने वाले लोगों को सहरी के समय खाने की चीजें देनी चाहिए। धन्यवाद।

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