आजमगढ़ विद्युत विभाग जहां बकाया बिजली बिलों की वसूली के लिए अभियान चलाकर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली बिलों में गड़बड़ी से आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मीटर लगाए अनुमानित खपत के आधार पर हजारों रुपये के बिल भेजे जाने से उपभोक्ताओं में नाराजगी है।
फूलपुर क्षेत्र के सुदनीपुर निवासी कुंदन यादव का मामला इसका ताजा उदाहरण है। उपभोक्ता के अनुसार, वह कनेक्शन लेने के बाद से नियमित रूप से फिक्स बिल जमा करते आ रहे थे। पहले उनका मासिक बिल करीब 200 से 250 रुपये आता था। लेकिन 24 अक्टूबर 2026 को मोबाइल पर 2,387 रुपये का बिल प्राप्त हुआ, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर थी। इसके महज तीन दिन बाद 27 अक्टूबर को 16,572 रुपये का दूसरा बिल भेज दिया गया, जिसकी अंतिम तिथि तीन नवंबर निर्धारित की गई।
महज तीन दिनों में बिल की धनराशि में हजारों रुपये का अंतर देखकर उपभोक्ता हैरान रह गए। मामले की जानकारी लेने के लिए वह विद्युत उपखंड फूलपुर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें मीटर लगवाने की सलाह दी गई। विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि मीटर रीडिंग के आधार पर बिल संशोधित किया जा सकेगा।
इस मामले में उपखंड अधिकारी विद्युत फूलपुर सुजीत कुमार गुप्ता ने बताया कि फिक्स बिल व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। अब एक किलोवाट के कनेक्शन पर न्यूनतम 108 यूनिट की खपत मानकर बिल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने संभावना जताई कि संबंधित उपभोक्ता का कनेक्शन दो किलोवाट का हो सकता है, जिसके आधार पर 218 यूनिट की खपत मानकर बिल भेजा गया होगा। उन्होंने उपभोक्ताओं को मीटर लगवाने की सलाह दी।
वहीं, उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब घरों में मीटर नहीं लगाए गए हैं तो हजारों रुपये के बिल किस आधार पर भेजे जा रहे हैं। यदि फिक्स बिल व्यवस्था समाप्त की गई है तो इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को पहले से क्यों नहीं दी गई? उपभोक्ताओं ने विभाग से बिल निर्धारण में पारदर्शिता बरतने और गलत बिलों को तत्काल संशोधित करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि विद्युत विभाग बकाया वसूली के साथ-साथ उपभोक्ताओं की बिल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कितनी गंभीरता दिखाता है।
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