निजी अस्पतालों की मनमानी पर स्वास्थ्य विभाग सख्त, HMIS रिपोर्टिंग में लापरवाही पर होगी विधिक कार्रवाई



संवाददाता जाबिर शेख 

आजमगढ़। संस्थागत प्रसव की निगरानी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सभागार में निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम संचालकों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. एन.आर. वर्मा ने की।
बैठक में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. उमाशरण पांडेय, डिप्टी सीएमओ डाॅ. अविनाश झा, महिला रोग विशेषज्ञ डाॅ. अर्चना मैसी, अजीत यादव, सहायक शोध अधिकारी हरिलाल सहित विभिन्न निजी अस्पतालों के संचालक एवं चिकित्सक मौजूद रहे।
सीएमओ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम में होने वाले प्रसव की मासिक रिपोर्ट स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाए। साथ ही संबंधित रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को भी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि रिपोर्टिंग में लापरवाही या निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं करने वाले निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि HMIS भारत सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचना प्रणाली है, जिसमें गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण एवं देखभाल से लेकर प्रसव, नवजात शिशुओं के जन्म और टीकाकरण तक की जानकारी दर्ज की जाती है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा तथा भविष्य की कार्ययोजनाएं तैयार की जाती हैं।
बैठक के दौरान अप्रैल से अगस्त 2026 तक निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों में हुए संस्थागत प्रसव से संबंधित रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई। सीएमओ ने सभी संबंधित संस्थानों को लंबित विवरण तत्काल पूरा करने तथा आगे से प्रत्येक माह निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) की भी जानकारी दी गई। निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम सूचनादाता पहचान संख्या (Informant ID) के माध्यम से अपने यहां होने वाले जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण करा सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय से सूचना दर्ज कराने पर 21 दिन के भीतर जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
डाॅ. एन.आर. वर्मा ने कहा कि जन्म-मृत्यु का समयबद्ध पंजीकरण नागरिकों को आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के साथ-साथ जिले के वास्तविक स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े तैयार करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों से स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण व्यवस्था में पूर्ण सहयोग करने की अपील की।

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