उत्तर प्रदेश के मेरठ में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। आरोप है कि हत्या के एक मुकदमे से शिकायतकर्ता का नाम हटाने के बदले दरोगा ने ₹2 लाख की रिश्वत मांगी। शिकायत मिलने पर एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और ₹20 हजार की पहली किस्त लेते हुए आरोपी दरोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह कानून के रखवालों की जवाबदेही का एक बड़ा उदाहरण होगा।
कानून सबके लिए बराबर है—वर्दी में हो या बिना वर्दी के, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई जरूरी है।
आपकी राय क्या है? ऐसे मामलों में दोषी पुलिसकर्मियों को नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए या सिर्फ कानूनी कार्रवाई काफी है?
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