आलेख ए के सिंह
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा कोलकाता और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पूरी की। बोस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की, लेकिन जल्द ही उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसक नीतियों से असहमति जताई और अपने स्वयं के मार्ग पर चलने का फैसला किया।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, बोस ने जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त करना था। उन्होंने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" और "जय हिंद" जैसे नारों के साथ देशवासियों को प्रेरित किया। बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की और इसके राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री और युद्ध मंत्री बने।
नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को एक विमान दुर्घटना में हुई थी, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उन्हें उनके साहस, दृढ़ संकल्प और देशभक्ति के लिए याद किया जाता है।
टिप्पणी आज लगभग नेता जी श्री शुभाष चंद्र बोस जी मात्र एक फोटो और नाम मात्र के रह गये है कदाचित नेता जी के आदेश त्याग बलिदान को लोग स्मरण कर उनके पद चिन्हों पर चलते
आज देश दुनिया कि यह स्थिति शायद ही होती।
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जी कि आत्मा लगभग भटक रही और लोगों के किरदार पर आंसू बहाने को अभिषप्त है
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