लेखक : डॉ. मोहम्मद सैफी अनवर
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया भारत के उन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल है, जिसकी पहचान केवल एक शिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक विविधता और अकादमिक उत्कृष्टता के मजबूत केंद्र के रूप में रही है। यह विश्वविद्यालय स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, समावेशी शिक्षा, भारतीयता, आधुनिक ज्ञान और सामाजिक न्याय की भावना को साथ लेकर आगे बढ़ता रहा है। ऐसे ऐतिहासिक विश्वविद्यालय का नेतृत्व संभालना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक बड़ी शैक्षिक, सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। इसी दृष्टि से प्रो. मजहर आसिफ का जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 16वें कुलपति के रूप में कार्यभार संभालना विश्वविद्यालय की यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
प्रो. मजहर आसिफ की जीवन यात्रा अपने आप में संघर्ष, मेहनत, विद्वता और प्रेरणा की कहानी है। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के लहसनिया गाँव जैसे साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने देश के प्रमुख शैक्षिक संस्थानों तक अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। सीमित संसाधनों में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रो. आसिफ ने अपनी लगन, अध्ययनशीलता और अनुशासन के बल पर यह साबित किया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। कभी जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने वाला विद्यार्थी आज देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति है। यह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की मिसाल है जो छोटे कस्बों, गाँवों और सीमित साधनों से बड़े सपने देखते हैं।
प्रो. आसिफ ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर फारसी, मध्य एशियाई अध्ययन, भारतीय मध्यकालीन इतिहास, सूफी परंपरा, भाषा और संस्कृति जैसे विषयों में गंभीर शैक्षिक कार्य किया। वे गौहाटी विश्वविद्यालय से लंबे समय तक जुड़े रहे और बाद में जेएनयू के फारसी एवं मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर बने। वे भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन स्कूल के डीन भी रहे। इस प्रकार उनका व्यक्तित्व केवल शिक्षक या प्रशासक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ऐसे विद्वान हैं जिनकी पकड़ इतिहास, संस्कृति, भाषा, शोध और शिक्षा नीति जैसे विविध क्षेत्रों पर मजबूत मानी जाती है।
प्रो. मजहर आसिफ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान प्राप्त हुआ है। उपलब्ध सार्वजनिक विवरणों के अनुसार उन्हें मिथिला रत्न सम्मान और अफगानिस्तान राष्ट्रपति पदक जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। ये सम्मान उनके शैक्षिक योगदान, फारसी अध्ययन, भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक शोध में महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं। उन्होंने अनेक पुस्तकों, शोध-पत्रों और शब्दकोश निर्माण जैसे महत्वपूर्ण अकादमिक कार्यों में भी योगदान दिया है। वे भारतीय और वैश्विक ज्ञान परंपरा के बीच सेतु के रूप में भी देखे जाते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से उनका जुड़ाव उनके नेतृत्व को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। नई शिक्षा नीति बहुविषयक अध्ययन, कौशल आधारित शिक्षा, शोध, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने पर जोर देती है। प्रो. आसिफ की सोच और शैक्षिक पृष्ठभूमि इसी दिशा के अनुरूप दिखाई देती है। उनके नेतृत्व में जामिया ने परंपरा और आधुनिकता के संतुलन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
उनके कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि 2026–27 सत्र के लिए 30 नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत मानी जा रही है। इनमें बी.टेक रोबोटिक्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एम.टेक मैटेरियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, जापानी और जर्मन अध्ययन जैसे आधुनिक विषय शामिल हैं। यह पहल बताती है कि जामिया केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भविष्य की जरूरतों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2025 में जामिया ने विश्वविद्यालय श्रेणी में देश में चौथा स्थान प्राप्त किया। सतत विकास लक्ष्य श्रेणी में भी विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। वास्तुकला और विधि शिक्षा के क्षेत्र में भी जामिया ने राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। यह उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि विश्वविद्यालय केवल एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि बहुआयामी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक स्तर पर भी जामिया की पहचान मजबूत हुई है। क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग और टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति बेहतर हुई है। यह संकेत है कि जामिया अब केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी शैक्षिक उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
प्रो. मजहर आसिफ के नेतृत्व में छात्र कल्याण, परिसर सुविधाओं और डिजिटल शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। एम्बुलेंस सुविधा, सुरक्षित परिसर, स्वच्छता, पेयजल और छात्र सहायता जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रयास हुए हैं। किसी भी विश्वविद्यालय की सफलता केवल इमारतों या रैंकिंग से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वहाँ का वातावरण छात्रों के लिए कितना सुरक्षित और संवेदनशील है।
तकनीकी शिक्षा और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में भी जामिया ने उल्लेखनीय पहल की है। एक्सआर इमर्सिव मीडिया लैब, डिजिटल गेम लैब, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण अकादमी और साइबर क्लब जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि विश्वविद्यालय आधुनिक तकनीकी युग की जरूरतों को समझते हुए आगे बढ़ रहा है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम और डिजिटल प्रशिक्षण आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुके हैं।
शोध और शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जामिया ने कई संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। संयुक्त शोध परियोजनाएँ, संगोष्ठियाँ और शैक्षिक आदान-प्रदान जैसे कदम विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं। प्लेसमेंट के क्षेत्र में भी जामिया के छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। कई छात्रों को उच्च वेतन पैकेज और विश्वस्तरीय संस्थानों में शोध के अवसर मिले हैं।
प्रो. मजहर आसिफ की नेतृत्व शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जा रही है कि वे शिक्षा की गहराई और प्रशासनिक संवेदनशीलता, दोनों को साथ लेकर चलना चाहते हैं। एक ओर वे भाषा, इतिहास और संस्कृति के विद्वान हैं, वहीं दूसरी ओर वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को भी उतना ही महत्व देते हैं। यही संतुलन उन्हें एक आधुनिक शिक्षाविद और प्रभावी प्रशासक के रूप में अलग पहचान देता है।
उनकी कहानी उन छात्रों और युवाओं के लिए विशेष प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। बिहार के एक छोटे गाँव से निकलकर देश के प्रमुख विश्वविद्यालय का नेतृत्व करना यह साबित करता है कि मेहनत, धैर्य, अध्ययन और स्पष्ट दृष्टि किसी भी व्यक्ति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती है।
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